Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का इंतजार कर रहे भक्तों के लिए इस साल जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है और रात के समय Nishita Kaal में जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। देश के अलग-अलग शहरों में मध्यरात्रि पूजा के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। दिल्ली के अनुसार इस साल Nishita Puja का समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक है।
जन्माष्टमी पर भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा, अभिषेक और आरती करते हैं। अगर आप भी Janmashtami 2026 Puja Muhurat, Vrat Vidhi, Puja Samagri और पूजा करने का सही तरीका जानना चाहते हैं, तो यह पूरी जानकारी आपके काम आएगी।
Janmashtami 2026 कब है?
इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात के समय हुआ था।
मुख्य जानकारी:
- जन्माष्टमी: 4 सितंबर 2026, शुक्रवार
- निशिता पूजा: रात में
- दिल्ली में Nishita Puja Muhurat: 11:57 PM से 12:43 AM
- मध्यरात्रि: लगभग 12:20 AM के आसपास
- दही हांडी: 5 सितंबर 2026, शनिवार
ध्यान रखें कि Puja Muhurat शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना बेहतर है।
Janmashtami 2026 Puja Muhurat
दिल्ली के पंचांग के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पूजा के लिए Nishita Kaal 11:57 PM से 12:43 AM तक रहेगा। यानी भक्तों के पास भगवान कृष्ण की विशेष मध्यरात्रि पूजा के लिए करीब 46 मिनट का शुभ समय रहेगा।

दूसरे शहरों में यह समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है। उदाहरण के लिए अलग-अलग भारतीय स्थानों के लिए पंचांग में Nishita Puja के समय में कुछ मिनट का अंतर दिखाई देता है। इसलिए यदि आप किसी खास शहर में रहते हैं तो उसी स्थान का पंचांग देखना उचित है।
जन्माष्टमी पर पूजा कैसे करें?
अगर आप घर पर Krishna Janmashtami Puja करना चाहते हैं तो पूजा को सरल तरीके से इस प्रकार कर सकते हैं।
1. सुबह घर की सफाई करें
जन्माष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। भगवान कृष्ण के लिए एक छोटा सा पूजा स्थान तैयार करें।
2. बाल गोपाल को सजाएं
भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की मूर्ति को साफ करके सुंदर वस्त्र पहनाएं। उन्हें मुकुट, मोरपंख और फूलों से सजाया जा सकता है।
3. झूला तैयार करें
कई घरों में जन्माष्टमी पर बाल गोपाल के लिए सुंदर झूला सजाया जाता है। झूले में भगवान कृष्ण की मूर्ति रखकर फूलों और सजावटी सामान से उसे सजाएं।
4. व्रत और संकल्प लें
जो लोग व्रत रखते हैं, वे सुबह भगवान कृष्ण का ध्यान करके व्रत का संकल्प ले सकते हैं। व्रत का प्रकार व्यक्ति की परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकता है।
5. रात में विशेष पूजा करें
निशिता काल शुरू होने से पहले पूजा की तैयारी पूरी कर लें। भगवान कृष्ण के सामने दीपक जलाएं, धूप लगाएं और फूल अर्पित करें।
इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से परंपरा के अनुसार बाल गोपाल का अभिषेक किया जा सकता है।
6. भगवान को भोग लगाएं
अभिषेक के बाद भगवान कृष्ण को नए वस्त्र पहनाएं और उन्हें माखन-मिश्री, फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित करें।
7. जन्मोत्सव मनाएं
रात 12 बजे के आसपास भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाएं। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और कृष्ण जी की आरती करें।
अंत में परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।
Janmashtami Puja Samagri List
घर पर पूजा करने के लिए आप अपनी परंपरा के अनुसार ये सामग्री रख सकते हैं:
- बाल गोपाल की मूर्ति
- नए वस्त्र
- मोरपंख
- मुकुट
- फूल और माला
- तुलसी दल
- चंदन
- रोली और अक्षत
- धूप और दीपक
- कपूर
- पंचामृत की सामग्री
- दूध, दही, घी और शहद
- गंगाजल
- माखन-मिश्री
- फल और मिठाई
- झूला
- पूजा की थाली
Janmashtami पर व्रत कैसे रखें?
जन्माष्टमी पर कई भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि पूजा के बाद व्रत खोलते हैं। हालांकि व्रत के नियम परिवार और धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

कुछ लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ लोग केवल पानी या अन्य निर्धारित चीजों का सेवन करते हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्या, गर्भावस्था, बुजुर्ग अवस्था या दवाइयां लेने की स्थिति में कठोर उपवास करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
व्रत रखने वाले भक्तों को पूरे दिन भगवान कृष्ण का स्मरण, भजन, मंत्र जाप और धार्मिक पाठ करने की परंपरा है।
Janmashtami पर कब खोलें व्रत?
व्रत खोलने यानी Parana का समय भी परंपरा और पंचांग के अनुसार निर्धारित होता है। कुछ परंपराओं में Nishita Puja के बाद व्रत खोलने की बात कही जाती है, जबकि धर्मशास्त्रीय गणना में अगले दिन तिथि और नक्षत्र की स्थिति के अनुसार Parana किया जाता है।
दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग में 5 सितंबर को सुबह 6:41 बजे के बाद ISKCON परंपरा के अनुसार Parana का समय दिया गया है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर की परंपरा को जरूर देखें।
Janmashtami 2026 का महत्व
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण ने धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लिया।
इस दिन मंदिरों में विशेष सजावट होती है। बाल गोपाल का श्रृंगार, भजन-कीर्तन, झांकियां और मध्यरात्रि जन्मोत्सव इस पर्व को विशेष बनाते हैं।
कृष्ण भक्त इस दिन भगवद्गीता का पाठ, कृष्ण नाम का जाप और सेवा जैसे धार्मिक कार्य भी करते हैं। इस साल 4 सितंबर को Ashtami और Rohini नक्षत्र का विशेष संयोग भी बताया गया है।
Janmashtami 2026: ध्यान रखने वाली बातें
जन्माष्टमी की पूजा में सबसे जरूरी चीज श्रद्धा और भक्ति है। पूजा की सामग्री या सजावट कम होने पर भी भक्त सरल तरीके से भगवान कृष्ण की पूजा कर सकते हैं।
अगर आप रात में पूजा कर रहे हैं, तो Nishita Muhurat का ध्यान रखें। साथ ही अपने शहर के अनुसार समय जरूर जांचें क्योंकि मध्यरात्रि पूजा का मुहूर्त स्थान के हिसाब से बदलता है।
Janmashtami 2026 Highlights
| जानकारी | समय/तारीख |
|---|---|
| Janmashtami 2026 | 4 सितंबर 2026, शुक्रवार |
| Nishita Puja (Delhi) | 11:57 PM – 12:43 AM |
| Midnight Moment (Delhi) | लगभग 12:20 AM |
| Parana (ISKCON Delhi) | 5 सितंबर, 6:41 AM के बाद |
| Dahi Handi | 5 सितंबर 2026 |
| मुख्य पूजा | मध्यरात्रि |
| मुख्य देवता | बाल गोपाल / श्रीकृष्ण |
Janmashtami 2026 इस बार 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। भगवान कृष्ण की विशेष पूजा मध्यरात्रि के Nishita Kaal में की जाएगी। दिल्ली के अनुसार पूजा का शुभ समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक है।
आप घर पर बाल गोपाल का श्रृंगार करके, पंचामृत से अभिषेक, माखन-मिश्री का भोग, मंत्र जाप और आरती करके जन्माष्टमी मना सकते हैं।
जय श्री कृष्ण! 🙏🦚💙
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