दिल्ली में पुरानी इमारत गिरने से 5 की मौत, PG में रह रहे छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल

दिल्ली में एक पुरानी इमारत के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत और बचाव दल ने मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए अभियान चलाया। इस घटना ने राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि हादसे का शिकार हुई इमारत लगभग 50 साल पुरानी थी। लंबे समय से रखरखाव की कमी और मौसम की मार के कारण भवन की स्थिति कमजोर हो गई थी। इसके आसपास कई पेइंग गेस्ट यानी PG हॉस्टल भी मौजूद थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के नजदीक होने के कारण यह इलाका छात्रों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी PG तथा किराये के कमरों में रहते हैं।

छात्रों के लिए बनाया गया था रहने का इंतजाम

दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले हजारों छात्र रहते हैं। पढ़ाई के लिए दिल्ली आने वाले विद्यार्थियों को कॉलेज और यूनिवर्सिटी के आसपास कमरा या PG मिलना सुविधाजनक होता है। इसी वजह से इस इलाके में किराये के आवास की मांग हमेशा बनी रहती है।

जानकारी के अनुसार, पुरानी इमारत के मालिक हरि राम बंसल ने भवन को दोबारा इस्तेमाल के योग्य बनाने के लिए कई महीनों तक काम कराया था। इमारत में मरम्मत और निर्माण से जुड़े बदलाव किए गए और अगस्त में यहां किरायेदारों का रहना शुरू हुआ। इनमें ज्यादातर छात्र बताए जा रहे हैं।

हालांकि, इमारत में रहने की शुरुआत होने के बावजूद निर्माण से संबंधित कुछ काम अभी भी जारी था। यही बात इस हादसे को और गंभीर बनाती है।

हादसे के वक्त बेसमेंट में काम कर रहे थे मजदूर

जिस समय इमारत ढही, उस वक्त बेसमेंट में मजदूरों के काम करने की बात सामने आई है। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान छह लोगों को मलबे से बाहर निकाले जाने की जानकारी है, जिनमें दो मजदूर भी शामिल थे।

इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। इससे यह संकेत मिलता है कि इमारत में निर्माण या मरम्मत का काम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था। किसी ऐसी इमारत में जहां लोग पहले से रह रहे हों, वहां निर्माण कार्य जारी रहने से सुरक्षा का जोखिम बढ़ जाता है।

इमारत के अचानक गिरने के बाद आसपास के लोगों में भी डर फैल गया। मलबा हटाने और उसमें फंसे लोगों की तलाश के लिए बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में बड़ी संख्या में पुराने मकान और व्यावसायिक इमारतें मौजूद हैं। इनमें से कई भवन दशकों पुराने हैं। समय के साथ लगातार बारिश, नमी, प्रदूषण और रखरखाव की कमी का असर भवन की संरचना पर पड़ सकता है।

ऐसे में किसी पुरानी इमारत को दोबारा रहने के लिए इस्तेमाल करने से पहले उसकी संरचनात्मक मजबूती की जांच बेहद जरूरी होती है। केवल दीवारों की मरम्मत, प्लास्टर या पेंट कराने से किसी पुराने भवन को सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भवन को रहने योग्य बनाने से पहले उसकी नींव, कॉलम, बीम, छत और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए। खासतौर पर तब जब उस इमारत में बड़ी संख्या में छात्र या अन्य किरायेदार रहने वाले हों।

निर्माण के दौरान किरायेदारों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता

इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इमारत में किरायेदारों के रहने के दौरान निर्माण कार्य जारी था। अगर भवन में रहने वाले लोगों और मजदूरों के लिए अलग-अलग सुरक्षित क्षेत्र नहीं बनाए गए हों, तो दुर्घटना की स्थिति में नुकसान काफी बढ़ सकता है।

बेसमेंट में चल रहा निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में आ सकता है। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, यह आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। अभी किसी एक कारण को हादसे की निश्चित वजह मानना जल्दबाजी होगी।

PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा भी चर्चा में

इस हादसे के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके आसपास मौजूद PG तथा किराये के मकानों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली पढ़ने आने वाले विद्यार्थी अक्सर ऐसी इमारतों में रहते हैं जिनके बारे में उन्हें भवन की उम्र या संरचनात्मक स्थिति की पूरी जानकारी नहीं होती। किराये पर कमरा लेते समय ज्यादातर छात्र लोकेशन, किराया, कॉलेज से दूरी और सुविधाओं पर ध्यान देते हैं। भवन की तकनीकी सुरक्षा आमतौर पर उनकी प्राथमिकता में नहीं होती।

ऐसे में मकान मालिकों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। पुरानी इमारतों की समय-समय पर जांच और खतरनाक भवनों के संबंध में उचित कार्रवाई जरूरी है।

हादसे की जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल इस घटना के बाद सबसे अहम सवाल इमारत की वास्तविक स्थिति और उसमें किए गए निर्माण कार्यों से जुड़े हैं। यह पता लगाना जरूरी होगा कि भवन को दोबारा इस्तेमाल में लाने से पहले उसकी संरचनात्मक जांच हुई थी या नहीं।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं और इमारत में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए थे।

दिल्ली का यह हादसा एक गंभीर चेतावनी की तरह है। पुरानी इमारत को नया रूप देना और उसे वास्तव में सुरक्षित बनाना दो अलग-अलग बातें हैं। यदि भवन की मजबूती की पर्याप्त जांच किए बिना उसमें लोगों को रहने दिया जाता है, तो छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है।

इस घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। साथ ही हादसे ने यह सवाल भी सामने ला दिया है कि राजधानी में पुराने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन और भवन मालिकों की जिम्मेदारी कैसे तय की जाएगी।

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