Foot drop क्या होता है?
Foot drop (जिसे ड्रॉप फुट भी कहा जाता है) एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने पैर को सामने की ओर या ऊपर की ओर (toes को उठाना) सही तरीके से नहीं उठा पाता। इसका मुख्य कारण पैर के सामने के हिस्से की मांसपेशियों की कमजोरी या लकवा (paralysis) होना है।

यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि किसी और न्यूरोलॉजिकल समस्या का लक्षण (symptom) हो सकता है।
लक्षण (Symptoms of Foot Drop)
- चलते समय पैर घसीटना (Foot dragging while walking)
- चलने में असमानता (Gait problem)
- हर कदम पर घुटना अधिक उठाना पड़ता है (High-stepping gait)
- पैर की उंगलियाँ जमीन पर पहले लगती हैं
- सुन्नता या कमजोरी महसूस होना
कारण (Causes of Foot Drop)
- पेरोनियल नर्व डैमेज (Peroneal Nerve Damage) – जो घुटने के पास से होकर जाती है
- स्लिप डिस्क या स्पाइनल इंजरी
- स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर
- न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर्स (जैसे कि MND, Charcot-Marie-Tooth disease)
- डायबिटीज न्यूरोपैथी
- लंबे समय तक पैरों को क्रॉस करके बैठना या प्लास्टर लगाना
नर्व डैमेज (Nerve Damage)
🔹1.सबसे कॉमन कारण है – पेरोनियल नर्व (Peroneal Nerve) का डैमेज होना।
कैसे होता है?
- लंबे समय तक पैर को मोड़कर बैठना
- टाइट प्लास्टर या क्रूचेस का दबाव
- एक्सीडेंट या फ्रैक्चर के समय नर्व पर चोट
- घुटने की सर्जरी के बाद
- डायबिटीज के कारण नर्व डैमेज (Diabetic Neuropathy)
🔹 2. मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी की समस्या (Brain or Spinal Cord Disorders)
हो सकता है:
- स्ट्रोक (Stroke) – ब्रेन में ब्लड सप्लाई रुकने से
- ब्रेन ट्यूमर या ब्रेन इंजरी
- स्लिप डिस्क या स्पाइनल कॉर्ड कंप्रेशन
- Multiple Sclerosis (MS)
- Cerebral Palsy
🔹 3. न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर (Neuromuscular Disorders)
ये वे बीमारियाँ हैं जिनमें मांसपेशियाँ और नर्व दोनों प्रभावित होते हैं।
उदाहरण:
- Motor Neuron Disease (MND)
- Charcot-Marie-Tooth Disease
- Muscular Dystrophy
🔹 4. मांसपेशियों की कमजोरी (Muscle Weakness)
कुछ मामलों में सिर्फ पैर की मांसपेशियाँ कमजोर होने पर भी फुट ड्रॉप हो सकता है।
🔹 5. ऑर्थोपेडिक कारण (Orthopedic Causes)
- पेल्विक या हिप इंजरी
- घुटनों या हड्डियों की सर्जरी के बाद जटिलताएँ
जांच (Diagnosis)
- फिजिकल एग्जामिनेशन – डॉक्टर चलने के तरीके को देखकर अनुमान लगाते हैं
- EMG (Electromyography) – मांसपेशियों और नसों की जांच
- नर्व कंडक्शन टेस्ट
- MRI या CT Scan – रीढ़ या ब्रेन में कोई समस्या तो नहीं
- ब्लड टेस्ट – शुगर लेवल आदि की जांच
इलाज (Treatment of Foot Drop)
- फिजियोथेरेपी – व्यायाम और एक्सरसाइज से मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना
- ऑर्थोटिक डिवाइस (AFO – Ankle Foot Orthosis) – जिससे पैर का मूवमेंट कंट्रोल किया जा सके
- दवाइयाँ – नसों की ताकत बढ़ाने के लिए
- सर्जरी – अगर नर्व डैमेज ज्यादा हो तो टेंडन ट्रांसफर सर्जरी की जा सकती है
- नर्व स्टिमुलेशन डिवाइस – इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जो चलने में मदद करें
घरेलू उपाय / सुझाव
- नंगे पैर न चलें
- लगातार बैठे रहने से बचें
- व्यायाम नियमित करें
- सही फुटवियर पहनें
- संतुलित डाइट लें
कब डॉक्टर से मिलें?
- अगर आप अचानक पैर घसीटने लगें
- पैरों में सुन्नता या कमजोरी हो
- चलने में परेशानी हो रही हो
जरूरी सुझाव
- आरामदायक जूते पहनें
- लंबे समय तक एक ही पोजिशन में न बैठें
- नियमित व्यायाम करें
- तुरंत डॉक्टर से मिलें अगर पैर घसीटना शुरू हो जाए