Mirzapur The Movie Review: कालीन भैया का भौकाल लौटा, जानिए कैसी है फिल्म

लंबे इंतजार के बाद Mirzapur: The Movie अब बड़े पर्दे पर दस्तक दे चुकी है। लोकप्रिय क्राइम-ड्रामा फ्रेंचाइजी की यह पहली थिएट्रिकल फिल्म है और इसमें एक बार फिर दर्शकों को कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना त्रिपाठी जैसे चर्चित किरदार देखने को मिल रहे हैं। फिल्म 4 सितंबर 2026 को रिलीज हुई और रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई।

वेब सीरीज के तीन सीजन देखने के बाद दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या फिल्म सिनेमाघर में वही पुराना ‘भौकाल’ पैदा कर पाएगी? शुरुआती समीक्षाओं को देखें तो फिल्म अपने पुराने फैंस को काफी हद तक संतुष्ट करती नजर आ रही है।

क्या है Mirzapur The Movie की कहानी?

फिल्म की कहानी मिर्जापुर की उसी दुनिया में आगे बढ़ती है, जहां सत्ता, बदला, परिवार और अपराध एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिल्म फ्रेंचाइजी की दुनिया के एक ऐसे अध्याय को सामने लाती है, जिसे दर्शकों ने पहले नहीं देखा था। कहानी में सत्ता पर कब्जे की लड़ाई और पुराने किरदारों के बीच टकराव को बड़े पर्दे के हिसाब से पेश किया गया है।

फिल्म की कहानी को पूरी तरह समझने के लिए Mirzapur वेब सीरीज से परिचित होना दर्शकों के लिए फायदेमंद रहेगा। पुराने किरदारों के रिश्ते, उनके बीच की दुश्मनी और पिछली घटनाओं का असर फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कालीन भैया के रूप में फिर छाए पंकज त्रिपाठी

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फिल्म की सबसे बड़ी ताकत एक बार फिर पंकज त्रिपाठी हैं। कालीन भैया के किरदार में उनकी वापसी फिल्म को मजबूत आधार देती है। उनके संवाद बोलने का अंदाज, स्क्रीन प्रेजेंस और किरदार की ठंडक फिल्म के कई दृश्यों को प्रभावशाली बनाती है।

कुछ समीक्षाओं में भी पंकज त्रिपाठी के प्रदर्शन को फिल्म का प्रमुख आकर्षण माना गया है। खासकर उन दर्शकों के लिए जो Mirzapur के पुराने फैंस हैं, कालीन भैया की वापसी अपने आप में फिल्म देखने की बड़ी वजह बनती है।

गुड्डू और मुन्ना की जोड़ी भी बरकरार

अली फजल एक बार फिर गुड्डू पंडित के रूप में नजर आते हैं, जबकि दिव्येंदु शर्मा मुन्ना त्रिपाठी के किरदार में लौटे हैं। दोनों किरदारों की अपनी अलग फैन फॉलोइंग है और फिल्म में उनकी मौजूदगी कहानी को पुराने Mirzapur वाले माहौल से जोड़ती है।

गुड्डू का आक्रामक अंदाज और मुन्ना की सनक फिल्म के मनोरंजन वाले हिस्से को मजबूत करते हैं। वहीं कहानी में नए किरदारों की एंट्री भी देखने को मिलती है, जिनमें रवि किशन और जितेंद्र कुमार प्रमुख नाम हैं

एक्शन और डायलॉग फिल्म की जान

Mirzapur की पहचान सिर्फ कहानी नहीं बल्कि उसके देसी डायलॉग, हिंसक एक्शन और किरदारों के अंदाज से भी रही है। फिल्म इसी फॉर्मूले को बड़े पर्दे पर और ज्यादा विस्तार देने की कोशिश करती है।

गोलियों की आवाज, गैंगवार, बदले की भावना और सत्ता की लड़ाई कहानी को लगातार आगे बढ़ाते हैं। सिनेमाघर में बड़े स्क्रीन और साउंड सिस्टम पर इन दृश्यों का असर OTT से अलग महसूस होता है।

सोशल मीडिया पर भी शुरुआती प्रतिक्रियाओं में कई दर्शकों ने फिल्म को दमदार मास एंटरटेनर बताया है, जबकि कुछ दर्शकों ने इसकी तुलना वेब सीरीज के पुराने सीजनों से करते हुए मिश्रित प्रतिक्रिया दी।

फिल्म की सबसे बड़ी कमी क्या है?

फिल्म का सबसे बड़ा कमजोर पक्ष इसकी लंबाई मानी जा सकती है। फिल्म की अवधि करीब 3 घंटे 17 मिनट है, इसलिए कुछ दर्शकों को बीच के हिस्सों में कहानी थोड़ी खिंची हुई महसूस हो सकती है।

कुछ समीक्षकों ने भी माना है कि फिल्म मनोरंजक होने के बावजूद जरूरत से ज्यादा लंबी लगती है। कहानी में कई घटनाएं और किरदार होने के कारण हर हिस्से की गति एक जैसी नहीं रहती।

यानी अगर आप तेज रफ्तार वाली दो घंटे की क्राइम फिल्म देखने की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो लंबाई आपको परेशान कर सकती है।

क्या Mirzapur The Movie देखनी चाहिए?

अगर आपने Mirzapur के तीनों सीजन देखे हैं और कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना त्रिपाठी के फैन हैं, तो फिल्म आपके लिए थिएटर में देखने लायक है। पुराने किरदारों की वापसी, एक्शन, देसी डायलॉग और सत्ता की लड़ाई इसे फ्रेंचाइजी के फैंस के लिए खास बनाते हैं।

वहीं अगर आपने वेब सीरीज नहीं देखी है, तो फिल्म के कई रिश्तों और संदर्भों को समझने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। ऐसे दर्शकों के लिए पहले Mirzapur की पिछली कहानी जान लेना बेहतर रहेगा।

Mirzapur The Movie Review: Verdict

कुल मिलाकर Mirzapur: The Movie अपने पुराने फॉर्मूले को बड़े पर्दे पर लेकर आती है और सबसे ज्यादा फायदा इसके लोकप्रिय किरदारों को मिलता है। पंकज त्रिपाठी का कालीन भैया वाला अंदाज, अली फजल का गुड्डू और दिव्येंदु की वापसी फिल्म को फ्रेंचाइजी की पहचान से जोड़े रखती है।

फिल्म हर दर्शक को समान रूप से प्रभावित करे, यह कहना मुश्किल है। लंबी अवधि और कुछ हिस्सों की धीमी गति इसकी कमियां हैं, लेकिन एक्शन, डायलॉग, पुराने किरदार और मिर्जापुर की दुनिया का ‘भौकाल’ पुराने फैंस को थिएटर तक खींचने के लिए काफी है।

हमारी रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐/5

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