मौलिक अधिकारों की रक्षा (Article 32) सुप्रीम कोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना। यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। – सुप्रीम कोर्ट रिट्स जारी कर सकता है:

       न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) सुप्रीम कोर्ट किसी भी विधि या कार्यपालिका के आदेश को असंवैधानिक घोषित कर सकता है यदि वह संविधान के विरुद्ध हो। यह शक्ति भारतीय संविधान को सर्वोच्च बनाए रखने का एक प्रभावशाली माध्यम है।

परामर्श शक्ति (Article 143) राष्ट्रपति किसी भी कानूनी या सार्वजनिक महत्व के मामले में सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकता है। सुप्रीम कोर्ट का उत्तर बाध्यकारी नहीं होता, लेकिन इसका नैतिक और संवैधानिक महत्व होता है।

विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition - SLP, Article 136) यह एक असाधारण शक्ति है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति किसी भी अदालत के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति मांग सकता है। यह न्यायिक प्रणाली की लचीलापन और सर्वोच्चता को दर्शाता है।

संघीय विवादों का समाधान (Article 131) सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो राज्यों के बीच उत्पन्न हुए संविधानिक विवादों का समाधान करता है। यह भारत के संघीय ढांचे को संतुलित रखने का कार्य करता है।

अपीलीय अधिकार (Appellate Jurisdiction) सुप्रीम कोर्ट उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुन सकता है:  संवैधानिक प्रश्नों पर दीवानी और आपराधिक मामलों में मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों में

सुप्रीम कोर्ट और जनहित याचिका (PIL)  अब कोई भी व्यक्ति जनहित के मुद्दे को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है।  1.प्रदूषण 2.गरीबी और भुखमरी  3.महिला और बाल अधिकार 4.भ्रष्टाचार

भारतीय सुप्रीम कोर्ट एक ऐसा संस्थान है जो देश में न्याय, स्वतंत्रता और समानता की भावना को जीवंत बनाए रखता है। यह न केवल कानून का संरक्षक है, बल्कि संविधान की आत्मा का रक्षक भी है। इसकी शक्तियाँ व्यापक हैं और जिम्मेदारियाँ भी उतनी ही भारी।