विराट कोहली, भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में से एक, ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करके क्रिकेट जगत को चौंका दिया। यह निर्णय उनके 14 साल के शानदार टेस्ट करियर का अंत था, जिसमें उन्होंने 123 टेस्ट मैच खेले, 9,230 रन बनाए, और 30 शतक और 31 अर्धशतक अपने नाम किए। कोहली का यह फैसला कई कारणों से महत्वपूर्ण है, और इसे समझने के लिए हमें उनके करियर, हाल के प्रदर्शन, और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर गहराई से विचार करना होगा। इस लेख में हम कोहली के संन्यास के पीछे के कारणों, उनके टेस्ट करियर की उपलब्धियों, और भारतीय क्रिकेट पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करेंगे।

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कोहली का टेस्ट करियर: एक शानदार सफर

विराट कोहली ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत 20 जून 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ किंग्सटन में की थी। उनकी पहली पारी में केवल 4 और दूसरी में 15 रन बने, लेकिन यह शुरुआत थी एक ऐसे खिलाड़ी की, जो जल्द ही भारतीय टेस्ट क्रिकेट का चेहरा बन गया। कोहली ने अपने करियर में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
- रन और शतक: कोहली ने 123 टेस्ट में 9,230 रन बनाए, जिसमें 30 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं। उनका औसत 46.85 रहा, जो उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन को दर्शाता है। वह भारत के लिए टेस्ट में सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में चौथे स्थान पर हैं, केवल सचिन तेंदुलकर (15,921), राहुल द्रविड़ (13,265), और सुनील गावस्कर (10,122) से पीछे।
- कप्तानी: कोहली ने 68 टेस्ट में भारत की कप्तानी की और 40 जीत हासिल की, जो किसी भी भारतीय कप्तान से अधिक है। उनकी कप्तानी में भारत ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
- दबदबा विदेशों में: कोहली का विदेशी पिचों पर प्रदर्शन असाधारण रहा, खासकर ऑस्ट्रेलिया में, जहां उन्होंने 7 शतक बनाए। 2014-15 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने 692 रन बनाए, जो किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा ऑस्ट्रेलिया में एक टेस्ट सीरीज में सबसे अधिक है।
- टेस्ट क्रिकेट का प्रचार: कोहली ने टेस्ट क्रिकेट को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी और इसे टी20 युग में प्रासंगिक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी आक्रामकता, फ फैब फोर (कोहली, जो रूट, स्टीव स्मिथ, और केन विलियमसन) में से वह पहले खिलाड़ी हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया।
कोहली ने न केवल बल्ले से, बल्कि अपनी फिटनेस, नेतृत्व, और जुनून के साथ भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी कप्तानी में भारत ने टेस्ट क्रिकेट में नंबर 1 रैंकिंग हासिल की और कई यादगार जीत दर्ज कीं।
संन्यास की घोषणा
12 मई 2025 को, कोहली ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक भावुक पोस्ट के जरिए टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने लिखा:
“14 साल पहले मैंने पहली बार टेस्ट क्रिकेट में नीली जर्सी पहनी थी। ईमानदारी से कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह प्रारूप मुझे इतनी लंबी यात्रा पर ले जाएगा। इसने मुझे परखा, मुझे आकार दिया, और मुझे जीवन भर के लिए सबक सिखाए।… टेस्ट में खेलना कुछ बहुत व्यक्तिगत है। शांत मेहनत, लंबे दिन, वो छोटे-छोटे पल जो कोई नहीं देखता लेकिन जो हमेशा आपके साथ रहते हैं। इस प्रारूप से दूर जाना आसान नहीं है — लेकिन यह सही लगता है। मैंने इसमें सब कुछ दिया, और इसने मुझे जितना मैंने सोचा था उससे कहीं ज्यादा दिया।… मैं हमेशा अपने टेस्ट करियर को मुस्कान के साथ याद करूंगा। #269, साइनिंग ऑफ।”
यहां #269 का मतलब है कि कोहली भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 269वें खिलाड़ी थे। यह घोषणा इंग्लैंड के खिलाफ 20 जून से शुरू होने वाली पांच टेस्ट मैचों की सीरीज से ठीक पहले आई, जिसके लिए कोहली को टीम का हिस्सा माना जा रहा था।

संन्यास के पीछे के कारण
कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के कई संभावित कारण हैं, जो उनके हाल के प्रदर्शन, व्यक्तिगत प्राथमिकताओं, और भारतीय क्रिकेट की स्थिति से जुड़े हैं। आइए इन कारणों को विस्तार से समझें:
1. हाल का खराब फॉर्म
कोहली का हाल का टेस्ट प्रदर्शन उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं रहा। 2024-25 के बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने पांच टेस्ट में केवल 190 रन बनाए, जिसमें पर्थ में एक शतक (100*) शामिल था। बाकी चार टेस्ट में उन्होंने केवल 85 रन बनाए, और उनकी तकनीकी कमजोरियां, खासकर ऑफ-स्टंप के बाहर की गेंदों पर, स्पष्ट हो गईं। उनके 10 में से 8 आउट स्लिप कॉर्डन में कैच के रूप में हुए।
उनका औसत पिछले 24 महीनों में 32.56 रहा, जो उनके करियर के सर्वश्रेष्ठ औसत 55.10 (2019 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 254* के बाद) से काफी कम है। यह खराब फॉर्म संभवतः उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर रहा था, और उन्होंने शायद यह महसूस किया कि अब वह उस स्तर पर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे, जिसके लिए वे जाने जाते थे।
2. मानसिक और शारीरिक थकान
कोहली ने हाल के वर्षों में मानसिक थकान और चोटों का जिक्र किया है। एक इवेंट में उन्होंने कहा था, “जब आप बाहर की निराशा को आत्मसात करने लगते हैं, तो आप खुद पर बोझ डालते हैं… और फिर आप सोचने लगते हैं कि ‘मेरे पास इस दौरे पर दो या तीन दिन बचे हैं, मुझे अब प्रभाव डालना होगा’। और आप और ज्यादा हताश हो जाते हैं।”
लगातार 14 साल तक टेस्ट क्रिकेट खेलना, जिसमें लंबे समय तक कप्तानी और विदेशी दौरों की चुनौतियां शामिल हैं, शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला हो सकता है। कोहली की उम्र (36 वर्ष) और उनके परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा भी इस निर्णय में महत्वपूर्ण हो सकती है।
3. वनडे क्रिकेट पर फोकस
कोहली ने टेस्ट संन्यास के बाद स्पष्ट किया कि वह वनडे क्रिकेट में खेलना जारी रखेंगे, और उनका मुख्य लक्ष्य 2027 में दक्षिण अफ्रीका में होने वाला वनडे विश्व कप है। कोहली पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं (2024 टी20 विश्व कप जीतने के बाद), और अब टेस्ट से संन्यास के साथ, वह अपनी सारी ऊर्जा और ध्यान वनडे क्रिकेट पर केंद्रित कर सकते हैं।
कोहली वनडे में पहले ही 51 शतक बना चुके हैं और 14,000 रन पार कर चुके हैं। वह 2023 विश्व कप फाइनल में हार को भुलाकर 2027 में भारत को चैंपियन बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। टेस्ट क्रिकेट की मांगों को छोड़कर, वह अपनी फिटनेस और फॉर्म को वनडे के लिए बेहतर बनाए रख सकते हैं।
4. इंग्लैंड दौरे की चुनौतियां
भारत को जून 2025 में इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है, जो नई विश्व टेस्ट चैंपियनशिप साइकिल की शुरुआत होगी। इंग्लैंड की स्विंग और सीम गेंदबाजी हमेशा से कोहली के लिए चुनौती रही है, खासकर 2014 के दौरे पर, जहां उन्होंने 10 पारियों में केवल 134 रन बनाए थे। हालांकि 2018 में उन्होंने 583 रन बनाकर शानदार वापसी की थी, लेकिन हाल का फॉर्म और उम्र को देखते हुए, वह शायद इस कठिन दौरे से पहले संन्यास लेना चाहते थे।
इसके अलावा, रोहित शर्मा (7 मई 2025 को टेस्ट संन्यास) और रविचंद्रन अश्विन (दिसंबर 2024 में संन्यास) के जाने के बाद, भारतीय टीम पहले ही अनुभव की कमी से जूझ रही है। कोहली ने शायद यह महसूस किया कि अब युवा खिलाड़ियों को मौका देने का समय है, जैसे यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल, और साई सुदर्शन।
5. परिवार और व्यक्तिगत जीवन
कोहली की शादी बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा से हुई है, और उनके दो बच्चे हैं—वामिका और अकाय। हाल के वर्षों में, कोहली ने परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा जाहिर की है। यह भी बताया गया कि कोहली और अनुष्का लंदन में अपने दूसरे घर में बसने की योजना बना रहे हैं।
उनके बचपन के कोच राजकुमार यादव ने एक साक्षात्कार में कहा था कि कोहली लंदन में स्थायी रूप से बस सकते हैं। कोहली की नेट वर्थ लगभग 96 मिलियन पाउंड (126 मिलियन डॉलर) है, जो उनकी वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है। टेस्ट क्रिकेट की मांगों से मुक्त होने के बाद, वह अपने परिवार और अन्य रुचियों, जैसे अपनी फाउंडेशन और बिजनेस वेंचर्स, पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।
6. बीसीसीआई के साथ बातचीत
रिपोर्ट्स के अनुसार, कोहली ने पिछले एक महीने से बीसीसीआई के साथ अपने संन्यास की योजना पर चर्चा की थी। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था, क्योंकि उनकी अनुभव इंग्लैंड दौरे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि, कोहली ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए संन्यास की घोषणा की। यह दर्शाता है कि उनका निर्णय सोचा-समझा और अंतिम था।
भारतीय क्रिकेट पर प्रभाव
कोहली का संन्यास भारतीय टेस्ट क्रिकेट के लिए एक युग का अंत है। उनके साथ-साथ रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन के संन्यास ने भारतीय मध्य क्रम को कमजोर कर दिया है। अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा भी अब नियमित रूप से टीम का हिस्सा नहीं हैं, जिससे रवींद्र जडेजा संभवतः सबसे अनुभवी खिलाड़ी होंगे।
- नई पीढ़ी का उदय: शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, और साई सुदर्शन जैसे युवा खिलाड़ियों को अब बड़ी जिम्मेदारी लेनी होगी। गिल को टेस्ट कप्तान के रूप में देखा जा रहा है, जो उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
- मध्य क्रम की कमजोरी: कोहली और रोहित के बिना, भारत का मध्य क्रम अनुभवहीन हो सकता है। केएल राहुल, ऋषभ पंत, और श्रेयस अय्यर को अब अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चेतेश्वर पुजारा की वापसी नंबर 3 पर स्थिरता ला सकती है।
- टेस्ट क्रिकेट की प्रासंगिकता: कोहली टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे। उनकी अनुपस्थिति में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नई पीढ़ी टेस्ट क्रिकेट को उसी जुनून के साथ अपनाती है।
क्रिकेट जगत की प्रतिक्रियाएं
कोहली के संन्यास की घोषणा के बाद क्रिकेट जगत से भावुक और प्रशंसनीय प्रतिक्रियाएं आईं:
- सचिन तेंदुलकर: “12 साल पहले, मेरे आखिरी टेस्ट के दौरान, आपने अपने दिवंगत पिता का धागा मुझे उपहार में देने की पेशकश की थी। यह मेरे लिए बहुत व्यक्तिगत था, लेकिन यह भाव मेरे साथ हमेशा रहा। आपका असली विरासत, विराट, अनगिनत युवा क्रिकेटरों को प्रेरित करने में है।”
- बीसीसीआई अध्यक्ष रॉजर बिन्नी: “विराट कोहली का नाम टेस्ट क्रिकेट के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में याद किया जाएगा। उनकी भूख और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।”
- गौतम गंभीर: “शेर की तरह जुनूनी खिलाड़ी! तुम्हें मिस करूंगा, चीक्स…”
- हरभजन सिंह: “क्यों संन्यास लिया? @imVkohli”
इन प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि कोहली का प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपनी भावना और नेतृत्व से क्रिकेट को समृद्ध किया।
कोहली की विरासत
विराट कोहली का टेस्ट करियर केवल रनों और शतकों का नहीं, बल्कि एक नई सोच का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को आक्रामकता, फिटनेस, और आत्मविश्वास दिया। उनकी कप्तानी में भारत ने विदेशी धरती पर जीत हासिल की, और उनकी बल्लेबाजी ने दुनिया भर में प्रशंसकों को प्रेरित किया।
- फिटनेस क्रांति: कोहली ने भारतीय क्रिकेट में फिटनेस के मानकों को ऊंचा किया। उनकी मेहनत और अनुशासन ने युवा खिलाड़ियों के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित किया।
- आक्रामक नेतृत्व: कोहली ने भारतीय टीम को रक्षात्मक से आक्रामक बनाया। उनकी “हम हार नहीं मानेंगे” वाली मानसिकता ने भारत को कई असंभव जीत दिलाई।
- प्रेरणा का स्रोत: कोहली की कहानी—दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार से विश्व क्रिकेट के शीर्ष तक—लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।
भविष्य की योजनाएं
संन्यास के बाद, कोहली का ध्यान वनडे क्रिकेट, परिवार, और उनकी अन्य रुचियों पर होगा। वह अपनी “विराट कोहली फाउंडेशन” के माध्यम से वंचित बच्चों की मदद करना जारी रखेंगे। इसके अलावा, वह अपने बिजनेस वेंचर्स और आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलने पर ध्यान दे सकते हैं, जहां उन्होंने 2025 में 505 रन बनाए।
कोहली ने पहले संकेत दिया था कि वह संन्यास के बाद यात्रा करना चाहते हैं और अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं। “मैं शायद कुछ समय के लिए दिखाई नहीं दूंगा,” उन्होंने एक इवेंट में कहा था।
विराट कोहली का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास एक युग का अंत है, लेकिन यह उनके करियर का अंत नहीं है। वह वनडे क्रिकेट में भारत का नेतृत्व करते रहेंगे और 2027 विश्व कप में एक नया अध्याय लिखने की कोशिश करेंगे। उनके टेस्ट करियर ने न केवल भारत को गौरवान्वित किया, बल्कि विश्व क्रिकेट को एक ऐसी शख्सियत दी, जो अपनी प्रतिबद्धता और जुनून के लिए हमेशा याद की जाएगी।
कोहली का यह फैसला उनके लिए और भारतीय क्रिकेट के लिए सही समय पर आया हो सकता है। यह युवा खिलाड़ियों को मौका देगा, और कोहली को अपनी प्राथमिकताओं को फिर से व्यवस्थित करने का अवसर देगा। जैसा कि उन्होंने कहा, “मैं हमेशा अपने टेस्ट करियर को मुस्कान के साथ याद करूंगा।” और क्रिकेट प्रशंसक भी उनकी यादों को मुस्कान के साथ संजोएंगे।