Vijay Rupani (2 अगस्त 1956 – 12 जून 2025) एक भारतीय राजनेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता थे, जिन्होंने 2016 से 2021 तक गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वे राजकोट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से गुजरात विधानसभा के प्रतिनिधि थे। उनकी राजनीतिक यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुई और वे धीरे-धीरे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे। उनकी सादगी, प्रशासनिक दक्षता और जनता के प्रति समर्पण के लिए उन्हें जाना जाता था। इस लेख में हम Vijay Rupani के जीवन, उनकी नेटवर्थ, परिवार और राजनीतिक करियर के बारे में विस्तार से जानेंगे।
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प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
Vijay Rupani का जन्म 2 अगस्त 1956 को रंगून (वर्तमान में यांगून), म्यांमार में एक जैन बनिया परिवार में हुआ था। वे अपने माता-पिता, रामनिक लाल रूपाणी और मायाबेन रूपाणी के सातवें और सबसे छोटे बेटे थे। उनके पिता रंगून में अनाज व्यापारी थे, लेकिन 1960 में म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता के कारण उनका परिवार भारत के राजकोट, गुजरात में स्थानांतरित हो गया। राजकोट में उनके पिता ने बॉल बेयरिंग का व्यापार शुरू किया, जिसके माध्यम से परिवार ने अपनी आर्थिक स्थिति को स्थिर किया।
Vijay Rupani ने अपनी स्कूली शिक्षा राजकोट में पूरी की। इसके बाद उन्होंने धर्मेंद्रसिंहजी आर्ट्स कॉलेज, राजकोट से कला स्नातक (BA) की डिग्री प्राप्त की और सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री (LLB) हासिल की। अपनी पढ़ाई के दौरान ही वे छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ गए।
राजनीतिक शुरुआत
Vijay Rupani ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1970 के दशक में शुरू की, जब वे ABVP के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हुए। 1971 में वे RSS और जनसंघ से जुड़े। 1975-77 के दौरान आपातकाल के समय, उन्होंने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया, जिसके लिए उन्हें 11 महीने तक भुज और भावनगर की जेलों में कैद रहना पड़ा। आपातकाल के बाद, 1978 से 1981 तक वे RSS के प्रचारक के रूप में कार्यरत रहे।
1980 में भाजपा की स्थापना के बाद, रूपाणी ने पार्टी के साथ अपनी यात्रा शुरू की। 1987 में वे राजकोट नगर निगम के पार्षद चुने गए और बाद में 1996-97 तक राजकोट के मेयर रहे। इस दौरान उन्होंने ड्रेनेज सिस्टम कमेटी के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया।
राजनीतिक करियर का विकास
राजकोट नगर निगम और गुजरात पर्यटन
Vijay Rupani ने 1998 में भाजपा की गुजरात इकाई के महासचिव के रूप में कार्य शुरू किया। 2006 में उन्हें गुजरात पर्यटन निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उसी वर्ष, वे 2006 से 2012 तक राज्यसभा के सांसद रहे। इस दौरान उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गुजरात विधानसभा और मंत्रिमंडल
2014 में, जब राजकोट पश्चिम के विधायक वजुभाई वाला ने गुजरात विधानसभा से इस्तीफा दिया, तब रूपाणी को इस सीट से उपचुनाव में भाजपा ने उम्मीदवार बनाया। वे भारी अंतर से जीते और गुजरात विधानसभा के सदस्य बने। नवंबर 2014 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें परिवहन, जल आपूर्ति, श्रम और रोजगार मंत्रालयों का प्रभार सौंपा गया।
2016 में, रूपाणी को गुजरात भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, लेकिन कुछ ही महीनों बाद, आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद, 7 अगस्त 2016 को वे गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल
Vijay Rupani ने 2016 से 2021 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण नीतियां और योजनाएं लागू की गईं:
- गुजरात औद्योगिक नीति 2020: इस नीति ने राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया और निवेश आकर्षित करने में मदद की।
- श्रमिक अन्नपूर्णा योजना: इस योजना के तहत निर्माण श्रमिकों को सस्ते दामों पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया।
- उजाला योजना: इस योजना के तहत एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और पंखों की कीमतों में कमी की गई, जिससे ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा मिला।
- सीमा दर्शन और सेवा सेतु: रूपाणी ने नदाबेट सीमा पर ‘सीमा दर्शन’ और ‘सेवा सेतु’ जैसे कार्यक्रम शुरू किए, जो जनसेवा और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए थे।
- आदिवासी उत्थान: आदिवासी समुदायों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गईं।
2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में, रूपाणी ने राजकोट पश्चिम सीट से जीत हासिल की और भाजपा को सत्ता में बनाए रखा। हालांकि, उनके कार्यकाल की आलोचना भी हुई, खासकर कोविड-19 महामारी के प्रबंधन को लेकर, क्योंकि गुजरात उन राज्यों में से एक था जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे।
11 सितंबर 2021 को, उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, और उनकी जगह भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया। इस्तीफे के बाद, रूपाणी को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया और उन्हें पंजाब और चंडीगढ़ के लिए पार्टी प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई।
नेटवर्थ और वित्तीय विवरण
2017 के चुनावी हलफनामे के अनुसार Vijay Rupani , विजय रूपाणी की कुल संपत्ति लगभग ₹9.08 करोड़ थी। इसमें उनकी चल संपत्ति (नकदी, जमा, और आभूषण) ₹3.45 करोड़ और उनकी पत्नी अंजलिबेन की चल संपत्ति ₹1.97 करोड़ थी। उनके पास 132 ग्राम सोने के आभूषण (मूल्य ₹3.83 लाख) और उनकी पत्नी के पास 486 ग्राम सोने के आभूषण (मूल्य ₹14.11 लाख) थे। उनके पास राजकोट में आवासीय संपत्तियां और सरकारी वाहन भी थे।
2016-17 के वित्तीय वर्ष के लिए उनकी आयकर रिटर्न के अनुसार, उनकी कुल आय ₹18,01,820 थी, जबकि उनकी पत्नी की आय ₹3,37,000 थी। उनकी चल संपत्तियों में ₹2,10,233 नकद और ₹74,93,158 बैंक जमा शामिल थे।
रूपाणी ने अपने हलफनामे में कोई आपराधिक मामले दर्ज न होने की घोषणा की थी। हालांकि, 2011 में, सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने Vijay Rupani एचयूएफ (हिंदू अविभाजित परिवार) सहित 22 संस्थाओं पर शेयर बाजार में हेरफेर और “पंप एंड डंप” घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था। सेबी ने ₹6.9 करोड़ का जुर्माना लगाया, जिसमें रूपाणी एचयूएफ पर ₹15 लाख का जुर्माना शामिल था। रूपाणी ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्होंने 2009 में ₹63,000 में शेयर खरीदे और 2011 में ₹35,000 में बेचे, जिससे उन्हें नुकसान हुआ। बाद में, सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने सेबी के आदेश को रद्द कर दिया, क्योंकि आरोपियों को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था।
कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि उनकी कुल संपत्ति ₹10-20 करोड़ के बीच हो सकती है, जिसमें उनकी राजनीतिक और व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं।
परिवार और व्यक्तिगत जीवन
Vijay Rupani का विवाह अंजलि रूपाणी से हुआ, जो भाजपा की महिला शाखा, भाजपा महिला मोर्चा की सदस्य हैं। दंपति के तीन बच्चे थे – दो बेटे, रुशभ और पुजित, और एक बेटी, राधिका। रुशभ एक इंजीनियरिंग स्नातक हैं, और राधिका की शादी चार्टर्ड अकाउंटेंट निमित मिश्रा से हुई है। दुर्भाग्यवश, उनके छोटे बेटे पुजित की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। पुजित की याद में, रूपाणी ने पुजित रूपाणी मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना की, जो सामाजिक कार्यों में योगदान देता है।
रूपाणी के छह बड़े भाई-बहन हैं, जो मुख्य रूप से राजकोट में पारिवारिक व्यवसाय और सामुदायिक कार्यों में शामिल हैं। उनके पिता, रामनिक लाल, राजकोट में रसिक लाल एंड संस नामक एक ट्रेडिंग फर्म चलाते थे। उनकी मां, मायाबेन, एक गृहिणी और धार्मिक व्यक्तित्व थीं।
रूपाणी का जीवन सादगी और अनुशासन से भरा था। वे पारंपरिक गुजराती पोशाक पसंद करते थे और अपनी सुलभता और सामुदायिक मूल्यों के लिए जाने जाते थे। उनके शौक में पढ़ना और यात्रा करना शामिल था।
विमान दुर्घटना और निधन
12 जून 2025 को,Vijay Rupani उस समय एक दुखद विमान दुर्घटना में मारे गए, जब वे लंदन के लिए एयर इंडिया की उड़ान AI171 में सवार थे। यह उड़ान अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद मेघानी नगर के एक आवासीय क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित 28 जमीन पर मौजूद लोगों की मृत्यु हो गई। रूपाणी अपनी बेटी से मिलने और अपनी पत्नी के साथ वापसी की यात्रा के लिए लंदन जा रहे थे।
यह दूसरी बार था जब गुजरात के एक पूर्व मुख्यमंत्री की विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई, इससे पहले 1965 में बलवंतराय मेहता की मृत्यु एक विमान दुर्घटना में हुई थी।
रूपाणी की मृत्यु को भाजपा और भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना गया। केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, और कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
व्यक्तित्व और विरासत
Vijay Rupani को एक शांत, सौम्य और कार्यकुशल नेता के रूप में जाना जाता था। उनकी बेटी राधिका ने एक बार कहा था कि उनके पिता की सादगी को अक्सर कमजोरी समझा जाता था, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करते थे।
उनके कार्यकाल में गुजरात ने औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में प्रगति की। उनकी नीतियों ने नरेंद्र मोदी और आनंदीबेन पटेल के शासन की निरंतरता को बनाए रखा। हालांकि, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने उन्हें “प्रॉक्सी” या “रबर-स्टैंप” मुख्यमंत्री के रूप में देखा, जो पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन करते थे।
रूपाणी की सादगी और जनता के प्रति उनकी सुलभता ने उन्हें राजकोट में एक लोकप्रिय नेता बनाया। उनके पड़ोसी और दोस्त उन्हें “विजयभाई” के रूप में याद करते हैं, जो हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे।
Vijay Rupani का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है – म्यांमार में जन्मे एक व्यक्ति ने, जो राजनीतिक अस्थिरता के कारण भारत में शरणार्थी के रूप में आया, अपनी मेहनत और समर्पण से गुजरात के मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचा। उनकी राजनीतिक यात्रा, जो ABVP और RSS से शुरू होकर मुख्यमंत्री के पद तक पहुंची, उनकी दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। उनकी सादगी, प्रशासनिक कौशल और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय राजनीति में एक विशेष स्थान दिलाया।
उनकी असामयिक मृत्यु ने न केवल गुजरात, बल्कि पूरे भारत में शोक की लहर पैदा की। उनकी विरासत, जो विकास, सामाजिक कल्याण और संगठनात्मक नेतृत्व पर आधारित है, आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।