स्पर्म की मोटिलिटी (गतिशीलता) पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मोटिलिटी का मतलब है कि स्पर्म कितनी अच्छी तरह तैरकर अंडे तक पहुंच सकता है, जो गर्भधारण के लिए आवश्यक है। यदि स्पर्म की मोटिलिटी कम है, तो यह पुरुष बांझपन का कारण बन सकता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि सही जीवनशैली, आहार और कुछ प्राकृतिक उपायों के माध्यम से स्पर्म की मोटिलिटी को बढ़ाया जा सकता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि स्पर्म की मोटिलिटी बढ़ाने के लिए क्या-क्या करना चाहिए।
स्पर्म मोटिलिटी क्या है?
स्पर्म मोटिलिटी वह क्षमता है, जिसके द्वारा स्पर्म गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब में अंडे तक पहुंचने के लिए तैरता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्वस्थ स्पर्म में कम से कम 40% स्पर्म को गतिशील होना चाहिए, और इनमें से 32% को प्रोग्रेसिव मोटिलिटी (आगे की ओर तैरने की क्षमता) होनी चाहिए। कम मोटिलिटी होने पर गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
Table of Contents
स्पर्म मोटिलिटी कम होने के कारण
स्पर्म मोटिलिटी कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे
👉हार्मोनल असंतुलन: टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन का असंतुलन।
👉जीवनशैली: धूम्रपान, शराब, और तनाव।
👉पोषण की कमी: जिंक, सेलेनियम, और विटामिन जैसे पोषक तत्वों की कमी।
👉पर्यावरणीय कारक: प्रदूषण, कीटनाशक, और गर्मी के संपर्क में रहना।
👉चिकित्सीय समस्याएं: वेरिकोसील, इंफेक्शन, या मधुमेह।
स्पर्म मोटिलिटी बढ़ाने के उपाय
1. संतुलित आहार लेंस्पर्म की मोटिलिटी बढ़ाने में आहार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निम्नलिखित पोषक तत्वों को अपने आहार में शामिल करें:
जिंक: जिंक स्पर्म उत्पादन और मोटिलिटी के लिए जरूरी है। सीप, कद्दू के बीज, मूंगफली, और दाल में जिंक प्रचुर मात्रा में होता है।
सेलेनियम: यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है, जो स्पर्म की गुणवत्ता बढ़ाता है। ब्राजील नट्स, मछली, और अंडों में सेलेनियम होता है।
विटामिन C और E: ये एंटीऑक्सिडेंट्स स्पर्म को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं। संतरे, कीवी, बादाम, और पालक में ये विटामिन पाए जाते हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड: मछली, अलसी के बीज, और अखरोट में ओमेगा-3 होता है, जो स्पर्म मेम्ब्रेन को मजबूत करता है।
एल-कार्निटाइन: यह अमीनो एसिड स्पर्म की गतिशीलता बढ़ाता है। रेड मीट और डेयरी उत्पादों में यह पाया जाता है।
आहार सुझाव:रोजाना फल और सब्जियां खाएं।प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें।पर्याप्त पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।
2. नियमित व्यायाम करेंनियमित व्यायाम टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाता है और स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार करता है। निम्नलिखित व्यायाम मददगार हो सकते हैं:एरोबिक व्यायाम: दौड़ना, तैरना, और साइकिलिंग रक्त संचार को बेहतर करते हैं, जो स्पर्म उत्पादन के लिए अच्छा है।योग: भुजंगासन, धनुरासन, और पश्चिमोत्तानासन जैसे योगासन प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
वेट ट्रेनिंग: मध्यम वजन उठाने से टेस्टोस्टेरोन बढ़ता है।
सावधानी: अत्यधिक व्यायाम, खासकर साइकिलिंग या लंबे समय तक गर्मी में व्यायाम, अंडकोष के तापमान को बढ़ा सकता है, जो स्पर्म के लिए हानिकारक है।
3. धूम्रपान और शराब छोड़ेंधूम्रपान और शराब का सेवन स्पर्म की मोटिलिटी और संख्या को कम करता है। अध्ययनों के अनुसार, धूम्रपान करने वालों में स्पर्म की गतिशीलता 13-17% तक कम हो सकती है। शराब भी हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ती है। इन आदतों को छोड़ने से कुछ ही महीनों में स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
4. तनाव
लंबे समय तक तनाव कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाता है, जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करता है। तनाव कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय करें:
मेडिटेशन: रोजाना 10-15 मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है।
गहरी सांस: प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम तनाव को नियंत्रित करते हैं।
हॉबी: पेंटिंग, संगीत, या बागवानी जैसे शौक तनाव को कम करते हैं।
5. वजन नियंत्रित करें
मोटापा स्पर्म की मोटिलिटी और गुणवत्ता को प्रभावित करता है। अधिक वजन होने पर हार्मोनल असंतुलन और अंडकोष में गर्मी बढ़ सकती है। स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए:संतुलित आहार लें।नियमित व्यायाम करें।पर्याप्त नींद लें (7-8 घंटे)।
6. गर्मी से बचें
अंडकोष का तापमान शरीर के सामान्य तापमान से 2-3 डिग्री कम होना चाहिए। अधिक गर्मी स्पर्म उत्पादन और मोटिलिटी को नुकसान पहुंचाती है। निम्नलिखित सावधानियां बरतें:टाइट अंडरवियर या जीन्स न पहनें।सौना, हॉट टब, या गर्म पानी से नहाने से बचें।लैपटॉप को गोद में रखकर काम न करें।
7. सप्लीमेंट्स का उपयोग
कुछ सप्लीमेंट्स स्पर्म मोटिलिटी को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही लें:
कोएंजाइम Q10: स्पर्म की ऊर्जा बढ़ाता है।
फोलिक एसिड: डीएनए संश्लेषण में मदद करता है।
एल-आर्जिनिन: रक्त प्रवाह को बेहतर करता है।
8. चिकित्सीय जांच और उपचारयदि जीवनशैली में बदलाव के बाद भी सुधार न हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें। निम्नलिखित जांच और उपचार मदद कर सकते हैं:
सेमेन एनालिसिस: स्पर्म की मोटिलिटी और संख्या की जांच।
हार्मोन टेस्ट: टेस्टोस्टेरोन और अन्य हार्मोन्स की जांच।
वेरिकोसील सर्जरी: यदि वेरिकोसील समस्या हो।एंटीऑक्सिडेंट थेरेपी: डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं।
9. पर्यावरणीय कारकों से बचें
कीटनाशक, भारी धातु, और रसायनों के संपर्क में आने से स्पर्म की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऑर्गेनिक भोजन चुनें और रसायनों से बचें।
10. नियमित यौन संबंध
नियमित यौन संबंध (हर 2-3 दिन में) स्पर्म की गुणवत्ता को बनाए रखता है। लंबे समय तक स्खलन न करने से स्पर्म की मोटिलिटी कम हो सकती है।क्या न करेंस्टेरॉयड या अवैध दवाओं का उपयोग न करें।अनावश्यक दवाओं से बचें।रात में देर तक जागने की आदत छोड़ें।