करोड़पति भल्लेवाला : दिल्ली के नेहरू प्लेस में एक छोटी सी टेबल पर दही भल्ले बेचने वाले मुकेश शर्मा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी कहानी मेहनत, लगन और स्वाद के जादू की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है। लोग उन्हें प्यार से “करोड़पति भल्लेवाला” कहते हैं, और यह उपनाम उनकी मेहनत और सफलता का प्रतीक बन चुका है। 1989 से शुरू हुआ उनका यह सफर आज एक ऐसी मिसाल बन गया है, जो यह साबित करता है कि सही दिशा में मेहनत और जुनून किसी को भी असाधारण ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
मुकेश शर्मा का जन्म दिल्ली में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि में खानपान का व्यवसाय कोई नई बात नहीं थी। उनके पूर्वज कोलकाता में दही भल्ले की दुकान चलाते थे, और यह परंपरा तीन पीढ़ियों से चली आ रही थी। उनके पिता दिल्ली आए और यहां भी यही व्यवसाय शुरू किया। मुकेश ने अपने परिवार की इस विरासत को न केवल संभाला बल्कि इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
मुकेश का बचपन दिल्ली की गलियों में बीता, जहां उन्होंने अपने पिता को दही भल्ले बनाते और बेचते देखा। इस दौरान उन्होंने स्वाद का महत्व और ग्राहकों की संतुष्टि को समझा। मुकेश ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद इस पारिवारिक व्यवसाय को पूर्णकालिक रूप से अपनाने का फैसला किया। उनके पास कोई औपचारिक डिग्री या बड़े संसाधन नहीं थे, लेकिन उनके पास था अपने काम के प्रति जुनून और स्वाद का वह जादू, जो आज उन्हें मशहूर बनाता है।

शर्मा जी चाट भंडार की शुरुआत
मुकेश शर्मा ने 1989 में नेहरू प्लेस में अपनी छोटी सी दुकान शुरू की, जिसे आज “शर्मा जी चाट भंडार” के नाम से जाना जाता है। उस समय उनकी दुकान सिर्फ एक फोल्डिंग टेबल और कुछ बुनियादी सामग्री तक सीमित थी। शुरूआत में वे प्रति प्लेट दही भल्ले मात्र 2 रुपये में बेचते थे। आज यह कीमत बढ़कर 50 रुपये प्रति प्लेट हो गई है, लेकिन स्वाद में कोई कमी नहीं आई।
नेहरू प्लेस, जो दिल्ली का एक प्रमुख वाणिज्यिक और तकनीकी केंद्र है, वहां मुकेश की दुकान ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। उनकी दुकान की सबसे बड़ी खासियत है उनके द्वारा घर पर तैयार किए गए 16 प्रकार के मसाले, जो उनके दही भल्लों को एक अनोखा स्वाद देते हैं। मुकेश बताते हैं कि उनके मसालों का रहस्य ही उनकी सफलता का आधार है। ये मसाले वे स्वयं तैयार करते हैं, और उनकी खजूर की चटनी की छह महीने की गारंटी होती है।
एक अनुमान: संभावित नेट वर्थ रेंज
नीचे दिए गए मॉडल के आधार पर एक rough estimate:
पैरामीटर | अनुमान |
---|---|
₹40 प्रति प्लेट की कीमत पर 300 प्लेट / दिन (एक व्यस्त दिन में) | ₹12,000/दिन |
साल में ~300 दिन काम | ₹3.6 लाख सालाना |
प्रति प्लेट लागत (दही, मसाला, आउटसोर्स salt, food-cost, GST—लगभग 25%) | ₹9,000 कुल राजस्व → ₹2.7 लाख शुद्ध सेविंग्स/दिन × 300 दिन = ₹8.1 लाख वार्षिक प्रॉफिट |
व्यवसाय शुरू: 1989 → 36 साल से | कुल प्रॉफिट लगभग ₹3 करोड़ (assume conservative) |
दही‑मसाला की ट्रेड-इन‑कष्ट (stocks, mixing), BMW वाहन, घर‑जायदाद | संभावित assets में शामिल |
स्वाद का जादू और अनोखी प्रक्रिया
मुकेश शर्मा की दुकान का संचालन बेहद व्यवस्थित और अनुशासित है। वे हर दिन सुबह अपने घर पर दही भल्ले तैयार करते हैं। एक बड़े भगोने में शुद्ध मूंग दाल से बने भल्ले बनाए जाते हैं, और कई डिब्बों में फेंटी हुई दही लाई जाती है। नेहरू प्लेस पहुंचने के बाद, वे अपनी छोटी सी टेबल पर दुकान सजाते हैं। भल्लों के बीच में दही डाली जाती है, और उसमें बर्फ डालकर उन्हें ठंडा रखा जाता है। जब ग्राहक आता है, तो भल्लों को प्लेट में डालकर दही और उनके खास मसालों से सजाया जाता है।
मुकेश का कहना है, “एक बार खाओगे, तो बार-बार आओगे।” यह उनका टैगलाइन है, और यह उनके दही भल्लों के स्वाद को पूरी तरह से दर्शाता है। उनकी दुकान पर हर दिन सुबह 10:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। लोग दूर-दूर से उनके दही भल्ले खाने आते हैं, और कई बार तो लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।
करोड़पति भल्लेवाला की कहानी
मुकेश शर्मा की कहानी सिर्फ स्वाद की नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और लगन की है। 1989 से शुरू हुए इस व्यवसाय ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया, बल्कि एक ब्रांड के रूप में भी स्थापित किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश ने इतने दही भल्ले बेचे हैं कि उनकी संपत्ति करोड़ों में पहुंच गई है। लोग उन्हें “करोड़पति भल्लेवाला” कहते हैं, और यह नाम उनकी मेहनत का प्रतीक है।
मुकेश की सफलता का एक और दिलचस्प पहलू है उनकी बीएमडब्ल्यू कार। वे कई बार अपनी लग्जरी कार में दुकान का सामान लेकर आते हैं, जो उनकी सादगी और सफलता का अनोखा मिश्रण दर्शाता है। एक छोटी सी टेबल पर दुकान लगाने वाला व्यक्ति, जो बीएमडब्ल्यू कार से सामान लाता है, यह दृश्य हर किसी को आश्चर्यचकित करता है।
नेहरू प्लेस: एक आदर्श स्थान
नेहरू प्लेस दिल्ली का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां कई तकनीकी कंपनियों के कार्यालय और कंप्यूटर बाजार हैं। यह स्थान मुकेश की दुकान के लिए एकदम उपयुक्त रहा, क्योंकि यहां हर दिन हजारों लोग आते-जाते हैं। नेहरू प्लेस मेट्रो स्टेशन की निकटता ने भी उनकी दुकान की पहुंच को और बढ़ाया। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा नेहरू प्लेस के रिवैम्प प्रोजेक्ट, जिसमें 2023 तक नए व्यावसायिक स्थान, शौचालय, स्काईवॉक और एम्फीथिएटर बनाए गए, ने इस क्षेत्र को और आकर्षक बना दिया। इससे मुकेश की दुकान पर ग्राहकों की संख्या में और इजाफा हुआ।
सफलता के पीछे का रहस्य
मुकेश शर्मा की सफलता के पीछे कई कारक हैं:
- स्वाद की गुणवत्ता: उनके दही भल्लों का स्वाद बेजोड़ है, और यह उनके घर पर तैयार किए गए मसालों और शुद्ध सामग्री के कारण है।
- ग्राहक संतुष्टि: मुकेश हमेशा ग्राहकों की संतुष्टि को प्राथमिकता देते हैं। उनकी दुकान पर हर ग्राहक को ताजा और स्वादिष्ट भोजन मिलता है।
- लगन और अनुशासन: 1989 से लगातार एक ही स्थान पर दुकान लगाना और हर दिन एक ही उत्साह के साथ काम करना उनकी लगन को दर्शाता है।
- पारिवारिक विरासत: तीन पीढ़ियों से चली आ रही खानपान की परंपरा ने उन्हें इस व्यवसाय में मजबूत आधार दिया।
- ब्रांडिंग: उनकी बीएमडब्ल्यू कार और “करोड़पति भल्लेवाला” का उपनाम उनकी अनोखी ब्रांडिंग का हिस्सा बन गया है।
प्रभाव और प्रेरणा
मुकेश शर्मा की कहानी आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित किया कि बड़े संसाधनों या डिग्रियों के बिना भी मेहनत और जुनून से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। फूड बिजनेस को हमेशा से लाभकारी माना जाता है, लेकिन मुकेश ने इसे एक कला में बदल दिया। उनकी दुकान पर आने वाले ग्राहक न केवल उनके दही भल्लों के दीवाने हैं, बल्कि उनकी सादगी और मेहनत की भी तारीफ करते हैं।
मुकेश शर्मा, यानी दिल्ली के “करोड़पति भल्लेवाले”, की कहानी एक छोटे से ठेले से शुरू होकर करोड़ों की संपत्ति तक पहुंची है। उनकी मेहनत, स्वाद के प्रति समर्पण और ग्राहकों के प्रति ईमानदारी ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। नेहरू प्लेस की भीड़भाड़ वाली गलियों में उनकी छोटी सी टेबल आज एक ब्रांड बन चुकी है। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि अगर आपके पास जुनून और मेहनत है, तो कोई भी सपना असंभव नहीं है। मुकेश शर्मा का यह सफर न केवल दिल्लीवासियों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।