भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध: कारण, प्रभाव और भविष्य

25 जुलाई 2025 को, भारत सरकार ने 25 ओवर-द-टॉप ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया, जिसमें उल्लू (Ullu), एएलटीटी (ALTT), डेसिफ्लिक्स (Desiflix), और बिग शॉट्स (Big Shots) जैसे लोकप्रिय नाम शामिल हैं। यह कार्रवाई सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) को इन प्लेटफॉर्म्स की वेबसाइट्स और ऐप्स को ब्लॉक करने के निर्देश के साथ लागू की गई। यह कदम अश्लील, आपत्तिजनक, और कुछ मामलों में अश्लील सामग्री (पोर्नोग्राफिक कंटेंट) प्रसारित करने के आरोपों के आधार पर उठाया गया, जो भारतीय कानूनों और सांस्कृतिक मानकों का उल्लंघन करता है। इस लेख में हम इस प्रतिबंध के कारणों, प्रभावों, कानूनी आधार, और डिजिटल मनोरंजन उद्योग पर इसके दीर्घकालिक परिणामों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।

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प्रतिबंध का पृष्ठभूमि और कारण

भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने पिछले एक दशक में तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, और डिज़्नी+ हॉटस्टार जैसे मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म्स के साथ-साथ, उल्लू, एएलटीटी, और डेसिफ्लिक्स जैसे छोटे प्लेटफॉर्म्स ने भी अपनी जगह बनाई। हालाँकि, इनमें से कई छोटे प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही थी, जिसे सरकार और सामाजिक संगठनों ने “अश्लील”, “अनैतिक”, और “सांस्कृतिक रूप से आपत्तिजनक” करार दिया।

कानूनी आधार

सरकार ने इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए कई कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया:

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67ए: ये धाराएँ इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील और यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण को प्रतिबंधित करती हैं। धारा 67 सामान्य अश्लीलता से संबंधित है, जबकि धारा 67ए अधिक स्पष्ट और गंभीर सामग्री को लक्षित करती है, जिसमें सजा के प्रावधान अधिक कठोर हैं (पहले अपराध के लिए 3 साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, और बार-बार अपराध के लिए 5 साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना)।
  • भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 294: यह धारा सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कृत्यों या भाषा के उपयोग को दंडित करती है।
  • महिलाओं का अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4: यह कानून महिलाओं के अपमानजनक चित्रण को रोकने के लिए बनाया गया है, और इन प्लेटफॉर्म्स पर सामग्री को इस कानून का उल्लंघन माना गया।

शिकायतें और जांच

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने जुलाई और अगस्त 2024 में उल्लू और एएलटीटी जैसे प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ शिकायतें दर्ज कीं, जिसमें इनके कंटेंट को नाबालिगों के लिए हानिकारक बताया गया। इसके अलावा, सामान्य जनता और सामाजिक संगठनों, जैसे कि “सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन”, ने भी इन प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की माँग की। संगठन के प्रमुख उदय माहुरकर ने ऐसी सामग्री को “भारत की सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने वाला” करार दिया। डिजिटल पब्लिशर कंटेंट ग्रिवांसेज काउंसिल (DPCGC), जो एक स्व-नियामक निकाय है और जिसमें 40 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं, ने भी इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ पहले कार्रवाई की थी, जिसमें उल्लू की 100 से अधिक वेब सीरीज़ को हटाने या संपादित करने का निर्देश दिया गया था।

आपत्तिजनक सामग्री

सरकारी जांच में पाया गया कि इन प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित सामग्री में निम्नलिखित समस्याएँ थीं:

  • यौन स्पष्ट दृश्य: कई वेब सीरीज़ में नग्नता और यौन दृश्यों को बिना किसी कहानी या सामाजिक संदर्भ के शामिल किया गया था, जिसे “पोर्नोग्राफिक” माना गया।
  • महिलाओं का अपमानजनक चित्रण: सामग्री में महिलाओं को अपमानजनक और अनुचित संदर्भों में दर्शाया गया, जैसे कि शिक्षक-छात्र या पारिवारिक रिश्तों में यौन दृश्य।
  • सामाजिक मूल्य की कमी: अधिकांश सामग्री में कोई कहानी, थीम, या सामाजिक संदेश नहीं था, और यह केवल दर्शकों को आकर्षित करने के लिए बनाई गई थी।
  • नाबालिगों तक पहुंच: ये प्लेटफॉर्म्स बिना उचित आयु सत्यापन के कंटेंट को सुलभ बना रहे थे, जिससे नाबालिगों तक इसकी पहुँच आसान हो रही थी।

प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स की सूची

सरकार ने 26 वेबसाइट्स और 14 ऐप्स (9 गूगल प्ले स्टोर और 5 ऐप्पल ऐप स्टोर पर) को ब्लॉक करने का निर्देश दिया। प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म्स में शामिल हैं:

  • उल्लू (Ullu)
  • एएलटीटी (ALTT)
  • डेसिफ्लिक्स (Desiflix)
  • बिग शॉट्स (Big Shots)
  • बूमेक्स (Boomex)
  • नवरसा लाइट (Navarasa Lite)
  • गुलाब ऐप (Gulab App)
  • कंगन ऐप (Kangan App)
  • बुल ऐप (Bull App)
  • जलवा ऐप (Jalva App)
  • वाउ एंटरटेनमेंट (Wow Entertainment)
  • लुक एंटरटेनमेंट (Look Entertainment)
  • हिटप्राइम (Hitprime)
  • फेनेओ (Feneo)
  • शोएक्स (ShowX)
  • सोल टॉकीज (Sol Talkies)
  • अड्डा टीवी (Adda TV)
  • हॉटएक्स वीआईपी (HotX VIP)
  • हलचल ऐप (Hulchul App)
  • मूडएक्स (MoodX)
  • नियोनएक्स वीआईपी (NeonX VIP)
  • फूगी (Fugi)
  • मोजफ्लिक्स (Mojflix)
  • ट्राइफ्लिक्स (Triflicks)
  • शोहिट (ShowHit)

कार्रवाई का कार्यान्वयन

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस कार्रवाई को गृह मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कानूनी मामलों के विभाग, और उद्योग संगठनों जैसे FICCI और CII के साथ परामर्श के बाद लागू किया। विशेषज्ञों, विशेष रूप से महिला और बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की सलाह भी ली गई। मंत्रालय ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को इन प्लेटफॉर्म्स की वेबसाइट्स और ऐप्स को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक करने का निर्देश दिया।

पहले की कार्रवाइयाँ

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की है। मार्च 2024 में, 18 अन्य ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, 19 वेबसाइट्स, 10 ऐप्स, और 57 सोशल मीडिया हैंडल्स को समान कारणों से ब्लॉक किया गया था। उस समय ड्रीम्स फिल्म्स, वूवी, येस्मा, हंटर्स, रैबिट, और प्राइम प्ले जैसे प्लेटफॉर्म्स को निशाना बनाया गया था। मई 2025 में, उल्लू ने मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद अपनी वेब सीरीज़ “हाउस अरेस्ट” को हटा लिया था। इसके अलावा, फरवरी 2025 में, मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को आईटी नियम, 2021 के तहत निर्धारित नैतिकता संहिता का पालन करने के लिए एक सलाह जारी की थी।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

समर्थन

  • राजनीतिक समर्थन: शिव सेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस कार्रवाई की सराहना की और कहा कि उन्होंने पहले भी संसद की संचार और आईटी स्थायी समिति में उल्लू और एएलटीटी के कंटेंट के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। उन्होंने इसे “लंबे समय से लंबित” कदम बताया।
  • सामाजिक संगठन: सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन जैसे संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया, इसे भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना।

आलोचना और बहस

  • कुछ सोशल मीडिया यूजर्स और उदारवादी समूहों ने इस प्रतिबंध को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। उनका तर्क है कि व्यक्तिगत पसंद को नियंत्रित करने के बजाय, सरकार को कंटेंट मॉडरेशन और आयु सत्यापन जैसे उपायों पर ध्यान देना चाहिए।
  • सोशल मीडिया पर मीम्स और मजाक भी वायरल हुए, जिसमें कुछ यूजर्स ने टेलीग्राम जैसे वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स की ओर इशारा किया, जहाँ ऐसी सामग्री अब भी उपलब्ध हो सकती है।

प्रभाव

ओटीटी उद्योग पर

  • आर्थिक प्रभाव: उल्लू डिजिटल लिमिटेड, जो फरवरी 2024 में ₹135-150 करोड़ जुटाने के लिए IPO लाने की योजना बना रहा था, को इस प्रतिबंध के कारण बड़ा झटका लगा। NCPCR और स्व-नियामक निकायों की आपत्तियों के बाद इसका IPO स्थगित कर दिया गया।
  • विश्वास का संकट: छोटे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, जो पहले से ही मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म्स जैसे नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, को इस प्रतिबंध ने और कमजोर कर दिया।
  • स्व-नियामक उपायों पर दबाव: DPCGC जैसे स्व-नियामक निकायों पर अब और सख्ती से कंटेंट की निगरानी करने का दबाव बढ़ेगा।

समाज पर

  • नाबालिगों की सुरक्षा: सरकार का दावा है कि यह प्रतिबंध नाबालिगों को अनुचित सामग्री से बचाने में मदद करेगा।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने में मदद करेगा, जबकि अन्य इसे रूढ़िवादी दृष्टिकोण मानते हैं।
  • वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स: प्रतिबंध के बावजूद, कुछ यूजर्स टेलीग्राम और अन्य अनियंत्रित प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ सकते हैं, जो सरकार के लिए एक नई चुनौती पेश करेगा।

भविष्य की संभावनाएँ

सख्त नियमन

यह प्रतिबंध डिजिटल कंटेंट के लिए सख्त नियमन की ओर एक बदलाव का संकेत देता है। सरकार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वह सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, जिसमें नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम जैसे बड़े नाम शामिल हैं, के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू कर सकती है। अप्रैल 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने ओटीटी और सोशल मीडिया पर यौन स्पष्ट सामग्री के खिलाफ एक जनहित याचिका पर सुनवाई की और केंद्र सरकार सहित कई बड़े प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया।

तकनीकी चुनौतियाँ

  • कंटेंट मॉडरेशन: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को अब उचित आयु सत्यापन और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम लागू करने की आवश्यकता होगी।
  • वीपीएन और अनियंत्रित प्लेटफॉर्म्स: प्रतिबंध के बावजूद, उपयोगकर्ता वीपीएन या टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके प्रतिबंधित सामग्री तक पहुँच सकते हैं, जिसे नियंत्रित करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
  • स्व-नियामक निकायों की भूमिका: DPCGC जैसे निकायों को अब और सक्रिय भूमिका निभानी होगी ताकि सरकारी हस्तक्षेप को कम किया जा सके।

सांस्कृतिक और नैतिक बहस

यह प्रतिबंध भारत में डिजिटल कंटेंट के आसपास सांस्कृतिक और नैतिक बहस को और तेज करेगा। एक ओर, कुछ लोग इसे सांस्कृतिक संरक्षण के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य इसे रचनात्मक स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं। भविष्य में, सरकार और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, जो न केवल कानूनी मानकों का पालन करे बल्कि दर्शकों की विविध पसंद को भी ध्यान में रखे।

25 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध भारत सरकार की डिजिटल स्पेस में अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम भारतीय कानूनों, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023, और महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन को लक्षित करता है। हालाँकि, यह प्रतिबंध कई सवाल भी उठाता है, जैसे कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कंटेंट मॉडरेशन की तकनीकी चुनौतियाँ, और वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स का उदय।

आने वाले समय में, ओटीटी उद्योग को सख्त स्व-नियामक उपायों को अपनाना होगा ताकि सरकारी हस्तक्षेप को कम किया जा सके। साथ ही, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका दृष्टिकोण रचनात्मक स्वतंत्रता को दबाए बिना नैतिक और कानूनी मानकों को बनाए रखे। यह प्रतिबंध डिजिटल मनोरंजन के भविष्य को आकार देने में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका प्रभाव तभी सकारात्मक होगा जब इसे संतुलित और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए।

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